हर इंसान की ज़िंदगी में एक ऐसा दौर आता है जब उसे लगता है कि उसकी मेहनत बेकार जा रही है।
वो कोशिश करता है, संघर्ष करता है, धैर्य रखता है… फिर भी परिणाम शून्य दिखता है।
दूसरों को तरक्की करते देख मन में सवाल उठता है —
“सबको मिल रहा है… बस मुझे क्यों नहीं?”
हममें से ज़्यादातर लोग अपनी यात्रा की तुलना दूसरों की सफलता से करने लगते हैं।
हम भूल जाते हैं कि दुनिया में हर जीवन की गति अलग है, हर सपने का समय अलग है, और हर परिणाम की कीमत अलग है।
आज की यह कहानी भी ऐसे ही एक सबक की कहानी है —
एक जंगल की, दो माताओं की, और उस सत्य की…
कि हर जन्म लेने वाली चीज़ की अपनी अवधि, अपना महत्व और अपनी नियति होती है।
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| "हर यात्रा की शुरुआत समान हो सकती है, लेकिन मंज़िल और समय अलग होता है।" |
एक घने और सुंदर जंगल में दो सहेलियाँ रहती थीं —
एक हथिनी (Elephant) और दूसरी कुतिया (Dog)।
दोनों एक-दूसरे से बहुत अलग थीं, फिर भी अच्छी दोस्त थीं।
एक दिन संयोग से दोनों एक ही समय में गर्भवती हुईं।
जंगल के पक्षी, पेड़, हवा — सब इस नए जीवन के आगमन की प्रतीक्षा करने लगे।
⏳ 3 महीने बाद…
कुतिया ने 6 प्यारे बच्चों को जन्म दिया।
पूरा जंगल खुशी से भर गया।
वो खेलते, कूदते, भौंकते — सबका मन मोह लेते।
हथिनी ने भी मुस्कुराकर उसे बधाई दी।
उसके पेट में भी जीवन पल रहा था, बस समय लंबा था।
⏳ फिर 3 महीने बाद…
कुतिया फिर गर्भवती हुई और फिर 6 बच्चों को जन्म दिया।
अब जंगल में उसके 12 बच्चे दौड़ रहे थे।
सब उसे बधाई दे रहे थे, उसकी तारीफ कर रहे थे।
हथिनी बस शांत होकर यह सब देखती…
और अपने भीतर बढ़ रहे जीवन को महसूस करती।
⏳ और 6 महीने बीत गए…
कुतिया ने तीसरी बार 6 बच्चों को जन्म दिया।
अब 18 महीनों में उसके कुल 18 बच्चे हो चुके थे।
लेकिन…
हथिनी के पास अब तक एक भी बच्चा नहीं था।
😕 डॉग के मन में शक पनपने लगा
एक दिन कुतिया खुद को रोक नहीं पाई और हल्के मज़ाक के अंदाज़ में, पर थोड़े ताने के साथ बोली —
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| "दूसरों की प्रगति देखने से मत घबराओ — तुम्हारी सफलता का समय अलग है।" |
“बहन… क्या तुम सच में प्रेग्नेंट हो?
हम दोनों एक साथ माँ बनने वाले थे,
मैंने 18 महीने में 18 बच्चों को जन्म दे दिया,
और तुम्हारे पास अभी तक एक भी बच्चा नहीं आया…
कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम बस सोच रही हो कि तुम माँ बनने वाली हो?”
यह सुनकर हाथीनी को बुरा नहीं लगा,
न उसने गुस्सा किया, न नाराज़ हुई…
बल्कि बहुत शांत, आत्मविश्वास से भरी आवाज़ में मुस्कुराकर बोली —
“बहन… तुमने जिन बच्चों को जन्म दिया, वो प्यारे, सुंदर, और छोटे हैं।
लेकिन मैं जिस जीवन को जन्म दूँगी, वो ‘साधारण’ नहीं होगा।”
“वो धरती पर कदम रखेगा, तो जमीन काँपेगी।
वो चलेगा, तो सब उसे महसूस करेंगे।
वो दिखेगा, तो लोग उसका सम्मान करेंगे।
वो आएगा, तो भीड़ भी रास्ता छोड़ेगी।”
“मैं जिसे जन्म देने वाली हूँ, वो छोटा परिणाम नहीं—
एक विशाल अस्तित्व है।
उसे तैयार होने में समय लगेगा…
क्योंकि बड़ी चीज़ें जल्दी नहीं बनतीं।”
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| "जो देर से मिलता है, वह महान होता है। धैर्य रखो — तुम्हारी बारी भी आएगी।" |
सीख — यही जीवन का सत्य है
- हमारी जिंदगी में भी यही होता है —
- कोई जल्दी सफल हो जाता है
- Bhan देर से, लेकिन बड़ा बनता है
- कोई संख्या में आगे होता है
- कोई प्रभाव में आगे होता है
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